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Monday, September 6, 2010

प्रलयंकारी मोती

डाकुओं के गिरोह से जान बचाती एक निबर्ल युवती कर्णनखा जा पहुंची एक मुनि की शरण में। मुनि ने अपनी शक्ति से कर्णनखा को दिया एक प्रलयंकारी मोती ताकि वह दुष्टों से अपनी रक्षा कर सके। परन्तु वह प्रलयंकारी मोती प्राप्त करने के पश्चात उसको अपनी शक्ति पर हो गया अभिमान और अपनी उस शक्ति के बल पर वह मचाने लगी आतंक। यहां तक की विराट नगर के राजा जयचंद की हत्या कर उसने कर लिया राज्य पर कब्जा। राजकुमारी रजनीगंधा जो उससे जान बचाकर भागी और खाई कसम की वह अपने पिता की हत्या का बदला कर्णनखा से लेकर रहेगी। और फिर.........?

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