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Wednesday, April 28, 2010

इंसाफ की लाठी

बैरिस्टर विश्वनाथ जो इंग्लैण्ड से वकालत पढ़कर लौटे थे अपने पिता प्रतापनाथ को अपराधियों और कातिलों के पक्ष में केस लड़ता देखा यह बात उनको इतनी नागवार गुजरी की बैरिस्टर विश्वनाथ अदालत में अपने पिता के खिलाफ ही केस लड़ने को तैयार हो गए। अब एक तरफ थे अपना पहला केस लड़ रहे बैरिस्टर विश्वनाथ जिसके मुवक्किल के खिलाफ थे कई सबूत और दूसरी तरफ उसके पिता नामी वकील प्रतापनाथ। और फिर............?

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